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यहाँ सब कुछ बिकता है , दोस्तों रहना जरा संभाल के !!! बेचने वाले हवा भी बेच देते है , गुब्बारों में डाल के !!! सच बिकता है , झूट बिकता है, बिकती है हर कहानी !!! तीन लोक में फेला है , फिर भी बिकता है बोतल में पानी!!! कभी फूलों की तरह मत जीना, जिस दिन खिलोगे... टूट कर बिखर्र जाओगे । जीना है तो पत्थर की तरह जियो; जिस दिन तराशे गए... "खुदा" बन जाओगे ।। _______शाम गौड़

डोंबिवलीकरांची 'बेधडक'

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#बेधडक हा बॉक्सिंग या खेळावर वर आधारित असलेल्या पहिला अॅक्शनपॅक्ड मराठी चित्रपट ज्यांनी सर्वांचे लक्ष वेधून घेतलं आहे.ज्या माध्यमातून एका सामान्य झुंजार खेळाळूचे जीवनपट आधारित आहे  ज्यात खऱ्या अर्थाने खेळाळूना उदभावणारे विविध प्रश्न,अडचणी,भावनात्मक गोष्टींना मात देत कसा आपल्या मेहनती व जिद्दीवर कसे ध्येय गाठू शकतो हे विषेशतः प्रदर्शित केलें गेलेला आहे!  ज्या मुळे हा चित्रपट खेळाळू व विद्यार्थी-पालकांसाठी अति प्रेरणात्मक ठरणार आहे हे नक्कीच मात्र, या चित्रपटाचं आकर्षण #डोंबिवलीकर_अभिनेता_गिरीश_टावरे__  गिरीश या चित्रपटातून मराठी सिनेसृष्टीत पदार्पण करत आहेत. हा चित्रपट आज १जूनला सर्वत्र महाराष्ट्र भर प्रदर्शित झालेलं आहे .ज्याला महाराष्ट्रभर प्रेक्षकां कडून उत्स्फूर्तपणे प्रतिसाद मिळत आहे!   तसेच #प्रवीण_बांदेकर यांचे संगीत लाभले असून #आदर्श_शिंदे, सिद्धार्थ महादेवन, बेला शेंडे, आनंदी जोशी, प्रवीण बांदेकर यांच्या सुमधुर आवाजात चित्रपटातील गाणी स्वरबद्ध करण्यात आली आहेत ह्या गाण्याने तरुणांमध्ये व सोशल मीडिया वर धुमाकूळ घातली आहे. #राही प्रॉडक्शन...

स्वामी विवेकानंद जी युवा युग प्रवर्तक

 भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म को लेकर कोई सवाल उठाने से पहले सौ बार सोचता है। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानंद ने धर्म को विज्ञान के नज़र से देखने का नया नज़रिया...

हरले भीमराय माझे हरले शिवराय

अर्रे ज्यांनी अखिल महाराष्ट्राचे भूषण बनून जगाला झुकवले, त्यांचेच अनुयायी आज एकमेकांना भिडले, कोण ते माथेफिरू ज्यांनी जातीने आम्हाला तोडले, अर्रे आठवा रे महार मराठे ...

SRG रचित कविता वो मेरे भीम थे !

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अंग्रेजों के शासनकाल में इस देश मे जो शतकों से गुलामों के भी गुलाम थे ऐसे समाज को गुलामी से आजाद करने वाले हमारे भीम थे! जब मनुवाद,जातियवाद, स्त्री असमानता,गुलामी की आग में  जलकर फसा पड़ा था देश मेरा .. उस वक्त कोयलों को इंसान बनाने वाले मेरे भीम थे ! दबाई जा रही थी इस देश मे ना जाने कितने सैकड़ों माँ बहन बेटिओं की आवाजें हिन्दू कोड बिल ला कर बुलंद उनकी आवाज कर दिखाने वाले मेरे भीम थे... जकडे हुये किसान थे सरकार सवकारों की जुल्म सितम की बेड़ियों में जब.. बेड़ियों को तोड़ कर उम्मीदों का पर लगाने वाले मेरे भीम थे! शिक्षा व पानी पीने का हक ना था सवर्णो द्वारा धिक्कारे हुए कौमों को उनके हक्क के खातिर सत्याग्रह कर समानता हक दिलाने वाले मेरे भीम जी थे.. युवा व मजदूर पिछड़े वर्गों उन्होंने नई रोशनी दिखाई है. सीखो- संगठित बनो -संघर्ष करो की राह दिखाई है.. 33 करोड़ देव सदियों से जो कभी ना कर सके.. हमारे बाबासाहेब ने वो क्रांति बदलाव की मशाल चंद सालों  में जलाई है! शाम कहता है और मैं लिखू भी कैसे उस महान मानव के इतने किस्से है कहु भी कैसे..बिना बोले मैं चुप रहु भी कैसे.. ...

यहाँ पर 10 रूपये के स्टैंप पेपर पर मुहर लगाकर बेच दी जाती है लडकियाँ !

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हमारे देश में महिलाओं की हालत किसी से छिपी नहीं है, एक तरफ तो हम एक कन्या को पूजते है तो दूसरी तरफ उसी कन्या की भ्रूण हत्या कर देते है. आज भले ही भारत की लड़कियां दुनियाभर में अपना परचम लहरा रही है, लेकिन उसी भारत का एक दूसरा पहलु भी है जिसमे कन्या भ्रूण हत्या, रेप, छेड़छाड़, दहेज़ और ना जाने कितने ही अपराध है जो लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ होते है. अभी हाल ही में देश की बेटी मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया है और लोगों को ये सन्देश दिया है कि मौका मिले तो हमारी बेटियां कुछ भी करके दिखा सकती है. शहरों और महानगरों में आपको वीमेन राइट्स की बात करने वाले कई लोग मिल जायेंगे लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी बुरे हाल है. आज हम आपको एक ऐसी प्रथा के बारे में बताने जा रहे है जो हमारे समाज पर किसी कलंक से कम नहीं है. ये प्रथा मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले से जुड़ी है. इस प्रथा को धड़ीचा प्रथा के नाम से जाना जाता है. इस धड़ीचा प्रथा में लड़कियों और औरतों को ख़रीदा और बेचा जाता है. जिसमे खरीदी हुई लड़कियों के साथ ना सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक शो...

फेरीवाल्यांचे वाढत्या साम्राज्याला जवाबदार कोण?

मनसे नी झोपलेल्या प्रशासनाला जागविण्याचा कार्य केला असला तरी ही फेरीवल्याना हटवण्याची जबादारी ही कोणत्याही राजकीय पक्ष संघटण्याचे नसून ही जबाबदारी पालिकेची आहेच त...