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मेरी शायरी दिल की डायरी...

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ऐ जिंदगी मैं तेरा साथ निभाता हूँ.. हर गम को भूलकर खुशियों के ख़्वाब सजाता हूँ! सिर्फ अपनी जीत पे ही नही  अपने हार का भी जशन मनाता हूँ अक्सर अपनी हर नाकामियों से मैं सिख जाता हूँ! ऐ जिंदगी मैं तेरा साथ निभाता हूँ....!! हासिल हुआ उसीको किस्मत समझ जाता हूँ.. जो खो गया उसको भुला पाता हूँ! मैं सीने में दर्द के बादल लिये मुस्कुराता हूँ! ऐ जिंदगी मैं तेरा साथ निभाता हूँ..!! अंगारो भरा है कठिन रास्ता-सफर मेरा , फिर भी बड़ी शान से हर कदम मै बढ़ाता हुँ.. ऐ जिंदगी मैं तेरा साथ निभाता हुँ ...!! कवि:- शाम गौड़ SRG

SRG रचित कविता वो मेरे भीम थे !

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अंग्रेजों के शासनकाल में इस देश मे जो शतकों से गुलामों के भी गुलाम थे ऐसे समाज को गुलामी से आजाद करने वाले हमारे भीम थे! जब मनुवाद,जातियवाद, स्त्री असमानता,गुलामी की आग में  जलकर फसा पड़ा था देश मेरा .. उस वक्त कोयलों को इंसान बनाने वाले मेरे भीम थे ! दबाई जा रही थी इस देश मे ना जाने कितने सैकड़ों माँ बहन बेटिओं की आवाजें हिन्दू कोड बिल ला कर बुलंद उनकी आवाज कर दिखाने वाले मेरे भीम थे... जकडे हुये किसान थे सरकार सवकारों की जुल्म सितम की बेड़ियों में जब.. बेड़ियों को तोड़ कर उम्मीदों का पर लगाने वाले मेरे भीम थे! शिक्षा व पानी पीने का हक ना था सवर्णो द्वारा धिक्कारे हुए कौमों को उनके हक्क के खातिर सत्याग्रह कर समानता हक दिलाने वाले मेरे भीम जी थे.. युवा व मजदूर पिछड़े वर्गों उन्होंने नई रोशनी दिखाई है. सीखो- संगठित बनो -संघर्ष करो की राह दिखाई है.. 33 करोड़ देव सदियों से जो कभी ना कर सके.. हमारे बाबासाहेब ने वो क्रांति बदलाव की मशाल चंद सालों  में जलाई है! शाम कहता है और मैं लिखू भी कैसे उस महान मानव के इतने किस्से है कहु भी कैसे..बिना बोले मैं चुप रहु भी कैसे.. ...

यहाँ पर 10 रूपये के स्टैंप पेपर पर मुहर लगाकर बेच दी जाती है लडकियाँ !

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हमारे देश में महिलाओं की हालत किसी से छिपी नहीं है, एक तरफ तो हम एक कन्या को पूजते है तो दूसरी तरफ उसी कन्या की भ्रूण हत्या कर देते है. आज भले ही भारत की लड़कियां दुनियाभर में अपना परचम लहरा रही है, लेकिन उसी भारत का एक दूसरा पहलु भी है जिसमे कन्या भ्रूण हत्या, रेप, छेड़छाड़, दहेज़ और ना जाने कितने ही अपराध है जो लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ होते है. अभी हाल ही में देश की बेटी मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया है और लोगों को ये सन्देश दिया है कि मौका मिले तो हमारी बेटियां कुछ भी करके दिखा सकती है. शहरों और महानगरों में आपको वीमेन राइट्स की बात करने वाले कई लोग मिल जायेंगे लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी बुरे हाल है. आज हम आपको एक ऐसी प्रथा के बारे में बताने जा रहे है जो हमारे समाज पर किसी कलंक से कम नहीं है. ये प्रथा मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले से जुड़ी है. इस प्रथा को धड़ीचा प्रथा के नाम से जाना जाता है. इस धड़ीचा प्रथा में लड़कियों और औरतों को ख़रीदा और बेचा जाता है. जिसमे खरीदी हुई लड़कियों के साथ ना सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक शो...

नेता होशियार देश लाचार

1000,500 के नोटों को तो बंद कर दिया पर मंदिरों, ज्वेलर्स और कई जगह पर चल रहे इस गोरख धंदे का क्या? काले का सफ़ेद black to white करने वाले पैसे के इन दलालों का क्या? क्या वाकई में यह बदलाव गरीब और स...